शर्म थी वो उनकी या बेकसी थी वो,
जाने क्यों आज मुझसे पर्दानशीं थी वो।
गुबार बनकर ढह गयीं इमारतें इस दिल की,
उनके लिए फकत इक दिल्लगी थी वो।
तूफ़ान तो था दिल में उनके भरा हुआ,
जाने क्या फ़िर उनकी बेबसी थी वो?
बनाये चाहे लाखों बहाने पे बहाने 'सोनू',
yahi hai इक hakeekat, मेरी ज़िन्दगी है वो।
Showing posts with label shayri. Show all posts
Showing posts with label shayri. Show all posts
Wednesday, June 10, 2009
Subscribe to:
Posts (Atom)
