
गैर को मुह लगा के देख लिया,
झूठ सच आजमा के देख लिया,
उनके घर जा के देख लिया,
दिल के कहने में आ के देख लिया,
कितनी फरहत 'फजा' थी बू-ए-वफ़ा {वफ़ा की खुशबू} में,
उसने दिल को जला के देख लिया,
जिसे दिल है वह नही सौदा,
हर जगह से मंगा कर देख लिया,
जाओ भी तुम क्या करोगे मेहर-ओ-वफ़ा ,
बारहा {बार-बार} आजमा के देख लिया,
इधर आईना है ऊधर दिल है,
जिसको चाहा उठा के देख लिया,
उसने सुबह शब्-ए-विसाल मुझे,
जाते जाते भी आ के देख लिया,
हमने भी खूब आशिकी का मज़ा लिया,
जल के देख लिया जला के देख लिया....

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