टूट जाऊंगा कभी टूट के जुड़ जाऊंगा,
आप जिस राह पे मोडेंगे मैं मुड़ जाऊंगा,
उंगलियाँ थाम रहा है कोई चुपके चुपके,
ऐसा लगता है की मैं ख़ुद से बिछुड़ जाऊंगा,
देर बस इतनी है आकाश पुकारे मुझको,
मैं अभी शाख पे हूँ फुर्र से उड़ जाऊंगा,
सुख की चादर तो है छोटी ये मुझे है मालूम,
मैं भी मुफलिस {गरीब} की तरह ख़ुद से सिकुड़ जाऊंगा,
मैं किसी रात के माथे का पसीना हूँ,
कल सुबह फूल पे "शबनम" सा निचुड़ जाऊंगा,

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