Wednesday, June 10, 2009

मेरी ज़िन्दगी है वो.......

शर्म थी वो उनकी या बेकसी थी वो,
जाने क्यों आज मुझसे पर्दानशीं थी वो।
गुबार बनकर ढह गयीं इमारतें इस दिल की,
उनके लिए फकत इक दिल्लगी थी वो।
तूफ़ान तो था दिल में उनके भरा हुआ,
जाने क्या फ़िर उनकी बेबसी थी वो?
बनाये चाहे लाखों बहाने पे बहाने 'सोनू',
yahi hai इक hakeekat, मेरी ज़िन्दगी है वो।

Tuesday, May 26, 2009

"मोहब्बत"

'मोहब्बत' से सीने से लगा लेंगे तो क्या होगा?
मुझे भी आप अगर अपना बना लेंगे तो क्या होगा ?
मिलेंगे दो दिल करेंगे प्यार की बातें 'मोहब्बत' से,
ये परदा दरमियाँ से जो हटा लेंगे तो क्या होगा ?
बिगड़ता कुछ नही है जान सहारा देने वालों का,
किसी का कुछ बनेगा, और तुम्हारा कुछ न बिगडेगा,
तुम्हारा नाज़ उठाता है अगर इसके लिए मेरी जान,
ज़रा बार-ए-मोहब्बत (मोहब्बत का बोझ ) गर उठा लेंगे तो क्या होगा ?
लगा कर तुमको सीने से कहूँगा शेर को 'बच्चे'
अगर 'सोनू' को सीने से लगा लेंगे तो क्या होगा ?

Saturday, March 14, 2009

Teri Yaad....

Aaj Teri Yaad Hum Seene Se Laga Ke Roye,
Tanhayi Me Tujhe Paas Bula Ke Roye,
Kayi Baar Pukara Is Dil Ne Tumhe,
Aur Har Baar Tumhe Na Paakar Roye.

Kuch Rishtey..

Kuch Rishtey Anjane Me Bandh Jate Hain,
Pahle Dil Fir Zindagi Se Jud Jate Hain,
Kahte Hain Is Rishtey Ko Dosti,
Jisme Dil Se Dil Na Jane Kab Jud Jate Hain.

JAKHM

Husn Wale Bhi Khoob Wafaon ka Sila Dete Hain,

Har Mod Par Ek 'Jakhm' Naya Dete Hain,

Aai Dost is Jahan Me Koi Apna Nahi,

Aag Lagti Hai To Patte Bhi Hawa Dete Hain.

PARINDA


होने लगी है जिस्म में जुम्बिश {हरकत} तो देखिये,


इस परकटे 'परिंदे' की कोशिश तो देखिये,


गूंगे निकल पड़े हैं जुबान की तलाश में,


सरकार के खिलाफ ये साजिश तो देखिये,


बरसात आ गई तो दरकने {फटने} लगी ज़मीन,


सूखा मचा रही ये बारिश तो देखिये,


उनकी अपील है की हम उनकी मदद करें,


चाकू की पसलियों से ये गुजारिश तो देखिये,


जिसने नज़र उठाई वही शख्स गुम हुआ,


इस जिस्म के तिलिस्म की बंदिश तो देखिये,....

FAZAA


गैर को मुह लगा के देख लिया,

झूठ सच आजमा के देख लिया,

उनके घर जा के देख लिया,

दिल के कहने में आ के देख लिया,

कितनी फरहत 'फजा' थी बू-ए-वफ़ा {वफ़ा की खुशबू} में,

उसने दिल को जला के देख लिया,

जिसे दिल है वह नही सौदा,

हर जगह से मंगा कर देख लिया,

जाओ भी तुम क्या करोगे मेहर-ओ-वफ़ा ,

बारहा {बार-बार} आजमा के देख लिया,

इधर आईना है ऊधर दिल है,

जिसको चाहा उठा के देख लिया,

उसने सुबह शब्-ए-विसाल मुझे,

जाते जाते भी आ के देख लिया,

हमने भी खूब आशिकी का मज़ा लिया,

जल के देख लिया जला के देख लिया....

Friday, March 13, 2009

WAQT


है जुस्तजू {तलाश} के खूब से खुबतर कहाँ ?

अब ठहरती है देखिये जाकर नज़र कहाँ ?

इक उम्र चाहिए की गंवारा हो नशे- इश्क {इश्क का नशा},

रखी है आज लज्जत-ए- जख्म-ए-जिगर {दिल पर चोंट खाने का मज़ा} कहाँ ?

हम जिस पे मर मिटे हैं वो बात ही कुछ और है,

आलम में तुझसे लाख सही तू मगर कहाँ ?

होती नही कबूल दुआ तर्क-ए-इश्क {इश्क को छोड़ने} की ,

दिल चाहता ही नही तो दुआ में असर कहाँ ?

'गालिब' निशात-ए-नगमों {खुशी के नगमे} में ढूढ़ते हो अब,

आए हो सुबह के "वक़्त" रहे रात भर कहाँ ?

RAWAANI


पत्थर के जिगर वालों गम में वो "रवानी"

ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है,

फूलों में ग़ज़ल रखना ये रात की रानी है,

उसमे तेरी जुल्फों की बेरब्त {अस्त-व्यस्त } कहानी है,

इक जेहन- ए-परेशां {परेशान दिमाग } में वो फूल सा चेहरा है,

पत्थर की हिफाजत में शीशे की जवानी है,

क्यूँ चांदनी रातों में दरिया पे नहाते हो?

सोये हुए पानी में क्या आग लगानी है?

इस हौंसला- ए- दिल पर हमने भी कफ़न पहना,

हंसकर कोई पूछेगा "क्या जान गंवानी है?"

रोने का असर दिल पर रह- रह के बदलता है,

आंसू कभी शीशा है आंसू कभी पानी है,

ये शबनमी लहजा है आहिस्ता ग़ज़ल पढ़ना,

तितली की कहानी है फूलों की जुबानी है......

SHABNAM





टूट जाऊंगा कभी टूट के जुड़ जाऊंगा,


आप जिस राह पे मोडेंगे मैं मुड़ जाऊंगा,


उंगलियाँ थाम रहा है कोई चुपके चुपके,


ऐसा लगता है की मैं ख़ुद से बिछुड़ जाऊंगा,


देर बस इतनी है आकाश पुकारे मुझको,


मैं अभी शाख पे हूँ फुर्र से उड़ जाऊंगा,


सुख की चादर तो है छोटी ये मुझे है मालूम,


मैं भी मुफलिस {गरीब} की तरह ख़ुद से सिकुड़ जाऊंगा,


मैं किसी रात के माथे का पसीना हूँ,


कल सुबह फूल पे "शबनम" सा निचुड़ जाऊंगा,



Jab bhi tanhayi ne unko sataya hoga

jab bhi tanhayi ne unko sataya hoga,

tab tab unko mera khyaal aaya hoga,

gam yeh nahi ki woh bhul gaye hamko,

gam yeh hai ki Ro Ro ke bhulaya hoga!